#काव्योत्सव -2
जैसे कुम्हार गीली मिट्टी से
लीप देता है
चाक पर घूमते घड़े पर
आई दरार,
जैसे रफूगर
अपनी कारीगरी दिखाता है
कपड़े में अकारण
आये छेद पर
या कभी-कभी
जानबूझकर किये गए पर भी
कोई निरंतर
लगाता रहता
लेप
सिलता है
धागे
बनाता रहता है
सुंदर
और सुंदर
भीतरी इलाका
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#लता