#काव्योत्सव #प्रेम
जिंदगी की शब में, है तू जो आफताब
जस्बात के अल्फाजों की, है तू जो किताब।
तन्हाइयों को जो मोड़ दे, रूमानियत की तरफ
आवाज़ आती है मेरे दिल से, कि तू ही है वो लाज़वाब।
बेशकीमती, किसी हीरे की तरह
जब तू मेरे दिल के झरोखे में समाती है
खुदा कसम, मैं बस देखता ही रहता हूं
तू एक ही अदा से अलग अलग रंग दिखाती है।
नज़राने तो कई पेश किए
मैंने भी तेरी तलबगारी में
मगर अधूरा ही रह गया तेरा तसव्वुर
तनहा रह गए हम, इस बेबसी की उधारी में।