ये उम्र बढ़ने की जगह घट जाती, तो क्या बात होती,
जिंदगी माँ की गोद में कट जाती, तो क्या बात होती,
माँ अपने दामन से मुझपे बस खुशियाँ बरसाती रहती
तकलीफें देख के ही पलट जाती, तो क्या बात होती,
माँ मेरी हर परेशानी को जैसे आँचल में समेट लेती थी,
गर जिंदगी भी यूँ ही सिमट जाती, तो क्या बात होती.