क्यूँ रहते अलग हैं मुसलमान हिंदु
है गंगा भी अपनी है अपनी ही सिंधु
अलग उनकी भाषा हमारी भी बोली
मनाते हैं वो ईद हम सब की होली
वो कहते हैं मेहताब हम कहते इंदु
क्यूँ रहते अलग हैं .....
हरा रंग उनका हमारा है भगवा
अगर उनकी शोहरत हमारा भी जलवा
वो कहते हैं नुक्ता और हम कहते बिंदु
क्यूँ रहते अलग हैं ......
....मन....