***??मोहम्मद रफ़ी--सुषमा श्रेष्ठा--
--?
*क्या हुआ तेरा वादा, वो कसम, वो इरादा
भूलेगा दिल जिस दिन तुम्हें
वो दिन ज़िन्दगी का आख़री दिन होगा
याद है मुझको, तू ने कहा था
तुम से नहीं रुठेंगे कभी
दिल की तरह से हाथ मिले हैं
कैसे भला छूटेंगे कभी
तेरी बाहों में बीती हर शाम
बेवफ़ा, ये भी क्या याद नहीं
ओ कहने वाले मुझको फ़रेबी
कौन फ़रेबी है ये बता
वो जिस ने ग़म लिया प्यार की ख़ातिर
या जिस ने प्यार को बेच दिया
नशा दौलत का ऐसा भी क्या
के तुझे कुछ भी याद नहीं