मोरल कहानियां
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समझदार
आर 0 के 0 लाल
एकदम नालायक लड़का है, इसमें दिमाग ही नहीं है। इससे ज्यादा समझदार तो जानवर होते हैं, रामप्रसाद ने नीरज को डाट लगाई। सुन कर छोटी बच्ची खुशी से चिल्लाई -”भैया को डांट पड़ गई वह तो जानवर से भी कम समझदार है।”
नीरज को ये बातें नागवार गुजरी। वह बड़ा हो गया है फिर भी उसके पिताजी हमेशा उसे डांटते रहते हैं। मां से बोला कि दिनभर काम करके शाम को अगर दोस्तों के साथ एक घूंट पी लिया, पान तंबाकू खा लिया तो कौन सा बड़ा अपराध कर दिया। सभी लोग एंजॉय करते हैं। बेटी ने पिता से कहा आप साबित करके दिखाइए कि हमारी बकरी ज्यादा समझदार है। बापू ने कहा- ठीक है।
शाम को सभी लोग इकट्ठा हुए। रामप्रसाद ने अपने झोले से आम, बबूल, नीम, अमरूद आदि तमाम तरह की पत्तियां और कटीली घास निकाल कर नीरज से बकरी को खिलाने को कहा। बकरी ने सब खा लिया। फिर उसने एक जहरीली घास का गुच्छा निकाला और उसे खिलाने के लिए कहा। नीरज ने कहा- बाबू इसे जानवर खाते हैं तो उनकी मौत हो जाती है। रामप्रसाद ने कहा - तुम खिलाओ। नीरज ने काफी प्रयास किया मगर बकरी ने उसे नहीं खाया।
देखो! बकरी सब कुछ खा जाती है मगर जहर नहीं खाती। तुम्हें पता है कि तंबाकू, शराब या फास्ट फूड सब कितना नुकसानदायक है फिर भी तुम उसे हमेशा खाते रहते हो। अब तुम्हीं बताओ कौन ज्यादा समझदार है? रामप्रसाद ने पूंछा। नीरज ने अपनी गलती समझते हुए इन सब को छोड़ देने का संकल्प किया।