Hindi Quote in Story by मधु जैन

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नयी सोच

"सुबह से ही घर में अँधेरा है।आठ बज गये, अभी तक न तो लाइट आई और न ही राधा बाई का पता था, कल ही कन्या भोज किया था। इसलिए आज बर्तन भी अधिक हैं।" जया परेशान हो रही।
राधा बाई के साथ उसकी नौ,दस साल की बेटी मीनू भी काम पर आती है। एक तो राधा उसे अकेले घर पर नहीं छोड़ सकती,दूसरा साथ में लाने से उसकी मदद भी हो जाती है। इतनी कम उम्र में भी मीनू काम बड़ी सफाई से करती हैं।
तभी घंटी बजती है। मीनू आ गयी।
"अरे मीनू आज बड़ी देर कर दी, देख आज बर्तन ज्यादा है पहले वह साफ कर लें,झाड़ू पोंछा उसके बाद में करना।"
"जी आंटी जी।"
जया देख रही मीनू के पैरों में कल उसके द्वारा लगाया आलता अभी भी लगा था। "तेरी माँ अभी तक नहीं आई कहाँ रूक गई।"
"माँ मिश्रा आंटी के यहाँ काम कर रही है। उन्होंने मुझसे काम नहीं कराया इसलिए मैं यहाँ आ गई।"
"क्यों नहीं कराया तुझसे काम ?"
"वो कह रहीं थी, कल ही तुझे दुर्गा मानकर पूजा है,और अब तुझसे अपने झूठे बर्तन साफ नहीं कराऊँगी।"
"सही तो कह रही है मैं भी तुझसे झूठे बर्तन साफ नहीं कराऊंगी।"
घबड़ा कर "नहीं आंटी अम्मा गुस्सा करेगीं फिर कभी मुझे कन्याभोज में नहीं जाने देगी।"
"अब तू स्कूल जाएगी मैं तुझे पढ़ाऊंगी और पढ़ाई का सारा खर्च उठाऊंगी।"
"सच आंटी।"
जया ने पलटकर उसकी ओर देखा उसका चेहरा दमक उठा था।
घर अब तेज रोशनी से जगमगा उठा।



मधु जैन जबलपुर

Hindi Story by मधु जैन : 111130046
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