#moralstories
"' मेरी नैतिक कहानी ""
इतना आसान कहाँ है जिन्दगी के बदलाव में ढलना, पर अपनों की ख्वाहिशें और एक उम्मीद हर किसी को आगे बढ़ने पर मजबूर कर ही देती है। मैं मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले की रहने वाली हूँ। मातृभारती पर मैं अपनी ही मोरल स्टोरी लिखने जा रही हूँ। कहते हैं भगवान ही इस सृष्टि को चलाता है, उसकी मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं होता। और मेरी सृष्टि मेरे माता पिता हैं। यहाँ हर एक बच्चा अपने माँ और पिता से संस्कार सीखते हैं, गुण सीखते हैं, चलना, बोलना, बल्कि जीवन का हर पड़ाव सीखते हैं, वैसे ही मैंने भी अपने माँ पापा से नैतिक कहानियाँ सीखी हैं। मुझे जिंदगी के हर बदलाव से डर लगता था। हर चीज के बदलने से डर लगता था। और फिर मेरे ही एक दोस्त ने मुझसे कहा, "बदलाव तो जिंदगी का नियम है।" बिना स्वार्थ के किसी को खुशियां देना , मुस्कुराने की बजह देना यही तो नैतिकता है। आप लोगों को ये तो पता ही है कि जब हम किसी को बेवजह ही खुशियां देते हैं ना तो इसका अपना ही एक मजा है। जब कोई अनैतिक काम आपके मन में आने की सोचे ना तो जल्दी से उसे भगा देना, ये सोचकर कि जब मैं अनैतिक नहीं तो अनैतिक क्यों करूँ। मुझे जन्म इसलिए मिला है ताकि मैं नैतिकता से अपने काम करूँ। आजकल लोगों को इतना वक़्त नहीं होता कि किसी की व्यक्तिगत जीवन को सुने या समझें पर इतना वक्त जरूर होता है कि खुद को सुनें। सचमुच दोस्तों मैंने खुद को सुनना सीखा है। किसी और के लिए नहीं खुद के लिये। क्योंकि जब हम खुद को सुनेंगे तभी आगे बढ़ेंगे,और आगे बढ़ने के लिए मोरल स्टोरी लिखेंगे। मुझे ये तो नहीं पता कि ये प्रतियोगिता कौन जीतेगा पर जो भी जीतेगा मुझे सबसे ज्यादा खुशी होगी, क्योंकि मातृभारती ही एक ऐसा मंच है जो ऐसी प्रतिभा को निखार सकता है उसका जीवन भी बना सकता है। इसलिए काम ऐसा करो जो मोरल हो और तुम्हारे सामने तो क्या तुम्हारे पीछे भी लोग तुम्हारे जैसे बनने की कोशिश करे। और खुश रहे। धन्यवाद मातृभारती टीम। मैं उम्मीद करती हूँ सब अपनी अच्छी से अच्छी मोरल स्टोरी लिखेंगे।
-- Neha