Hindi Quote in Story by Ashish Kumar Trivedi

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देश के सिपाही

सविता सोंच रही थी कि कितनी जल्दी छुट्टियों के ये दिन बीत गए। अब ना जाने कब छुट्टी मिले। मिले भी या नहीं। आखिरकार देश के उस हिस्से में हालात भी तो सही नहीं चल रहे हैं। कितनी कठिन ड्यूटी होती है।
जाने का समय हो रहा था। सविता भेजने की तैयारी करने लगी। उसने अपने बनाए बेसन के लड्डू डब्बे में डाले। अभी कुछ और लड्डू आ सकते थे। उसने और लड्डू डाले और डब्बा बंद कर दिया। उसके अकेले के लिए थोड़ी ना बनाए थे। यह तो पूरी यूनिट के लिए हैं। जाते ही सब चाव से खाएंगे। देखते ही देखते सब खत्म हो जाएंगे। सविता का मन द्रवित हो गया। वो सब भी तो अपने बच्चे हैं। सभी घर से दूर देश की सेवा कर रहे हैं।
मन ही मन सविता ने ईश्वर से प्रार्थना की कि देश की रक्षा में तैनात सब बच्चों की रक्षा करे। सारी तैयारी कर लेने के बाद उसने अपने बेटे को पुकार कर कहा कि जाने की सारी तैयारी हो गई है। वह जल्दी करे जाने का बखत हो रहा है।
सविता की पोती अपनी माँ की आवाज़ मोबाइल पर रिकॉर्ड कर रही थी। सविता ने उससे कहा कि अब वह बस करे। अपनी माँ को जाने दे।
सीआरपीएफ में जवान उसकी बहू ने जब विदाई ली तो सविता ने समझाते हुए कहा कि तुम घर की फिक्र मत करना। मैं सब संभाल लूँगी। तुम तो बस बहादुरी से डटी रहना। पूरे मन से अपनी ड्यूटी करना।

Hindi Story by Ashish Kumar Trivedi : 111127143
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