यह सच है एक दिन हम तुम्हें भूल जायेगें।
यकीं ये भी है न तुम्हें याद आयेगें ।।
मगर जो तड़प है वो इस पल बहुत है।
अभी हम भी रोयेगें तुमको रोयेगें ।।
खता किस की थी ये नहीं जानता दिल। ।
मगर रस्में दुनिया जो हम तुम निभाएंगे ।।
उलझाया खुद को तो सोचा नहीं था ।
कि अंजाम उलझन का उलझन ही पायेंगे।।
चेहरे से धोखा न वो दे सके तो ।
भावों से छल कर हमे वो गये हैं ।।
हमें दर्द देकर वो कितना भी हंस लें ।
मगर खुद को खुद से वो कैसे छिपायेंगे।।
Devesh kumar mishra advocate