?इच्छा को सही दिशा की जरुरत है रोक-टोक की नहीं |...ॐD
बच्चे सी मासूमियत बड़ों में भी देखी जा सकती है पर उसे ज्यादा रोका टोका ना जाए तो जैसे कि बच्चा कहीं पर भी खुलकर हंसे/डांस करें/ गानागाए / पुछे / बोले आदि पर यही बात अगर बड़ों की आती है तो उसे कहा जाता है इतना क्या हंसते हो ! / ऐसे कैसे डांस करते हो !/ ऐसे कैसा बेसुरा गाते हो ! /ऐसा क्यु पुछा समझ नहीं ! /ऐसा कैसे बोल दिया ! आदि लोग क्या कहेंगे ? बच्चे को यह नहीं मालूम होता कि कहां ? कब ? कैसे ? करना चाहिए और कहां नहीं इसलिए वह हर जगह कुछ भी करते हैं | इतनी समझ नहीं होती कि कहां क्या करना चाहिए और कहां नहीं इसलिए सिर्फ यही सिखाना है खुल कर जिओ पर कहां क्या कीया जाता है और कहां नहीं यही बताना है | इच्छा को दबाया नहीं जाता उसे सही दिशा दी जाती है | तभी सबमें मासुमियत /भोलापन/ मुस्कान रहेगी/ दिखेंगी |...ॐD