#moral story- दोस्ती का फर्ज
रवि और विनय दोनों बचपन के गहरे दोस्त थे।दोनों में जहां रवि हंसमुख, मेहनती मिलनसार,सकारात्मक सोच वाला लडका था।वहीं विनय वहमी,अंधविश्वासी के साथ नकारात्मक सोच वाला था। दोनों इम्तिहान के बाद अच्छी नौकरी पाने के लिए, कोशिश कर रहे थे।
एक बडी कंपनी से, नौकरी के लिए, इन्टरव्यू लेटर पाकर दोनों तैयारी में जुट गए।नियत दिन, विनय निकलने से पहले, अपनी आदत के अनुसार राशिफल पढने लगा। जिसके अनुसार- "आज आप पर शनि भारी है, अनिष्ट की आशंका है, घर से बाहर न जाएं"-पढकर विनय बहुत दुखी हुआ।और उसने इन्टरव्यू में न जाने का फैसला कर, रवि को फोन कर, मना कर दिया।
रवि ने उसे बहुत समझाया, पर विनय इंटरव्यू देने राजी न हुआ।
कुछ देर बाद, विनय के पास, घबराए हुए एक दोस्त का फोन आया-" रवि का एक्सीडेंट हो गया है" -सुनकर वह घबराकर,बिना कुछ सोचे अस्पताल की ओर भागा।पर रवि को सकुशल हंसते हुए देखकर आश्चर्य और गुस्से से बोला- "अरे!. तुम तो ठीक हो? झूठा फोन क्यों?!!"
तब रवि बोला " देख विनय, मेरे एक्सीडेंट की खबर सुनकर तू यहां सकुशल आ गया,हम सब ने मिलकर, ये झूठा नाटक किया था।तुझे अंधविश्वास से बाहर निकालने के लिए"
"आज अंधविश्वास की वजह से, तुम इन्टरव्यू नही देते।
*व्यक्ति को सदा अपने कर्म पर भरोसा करना चाहिए* "- रवि ने समझाते हुए कहा।
आखिर विनय को रवि की बात समझ आ गई, और उसने आगे से अंधविश्वास छोड, मेहनत से सफलता प्राप्त करने का संकल्प लें लिया।
(मौलिक)
अर्चना राय, भेडाघाट, जबलपुर (म. प्र. )