Hindi Quote in Story by Archana Rai

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#moral story - भूख


शारदा अपनी खानदानी परंपरा के अनुसार,अपनी नई बहू को आशीर्वाद दिलाने मंदिर लेकर आई थी।मंदिर पहुंच कर वे अभी कार से, उतर भी न पाई थी कि, भीख मांगते बच्चों ने उन्हें घेर लिया। बच्चे बडी आस से उनके लाए फल, मिठाई आदि को देखने लगे।

"लो बेटा लड्डू, खाना है"- भूख से व्याकुल बच्चों को, लड्डू देकर, बहू ने कहा।
और सारे लड्डू बांटने लगी।

"अरे बहु, ये क्या किया? क्या तुम्हें पता नहीं?मंदिर आकर सबसे पहला भोग भगवान को लगाना चाहिए ,बाद में दूसरों को ".....
"यह आज की आधुनिक पीढ़ी, न रीति रिवाज से मतलब है, न धर्म से,बडो की बात मानना तो इनको आता ही नहीं है "- नाराज शारदा बडबडाते हुए मंदिर की सीढ़ियां चढ़ने लगी ।

"माफ करना! मां जी आपका अपमान करना, मेरी मंशा नहीं है"-पीछे आती बहू ने कहा।
"भगवान तो सिर्फ श्रद्धा और भाव के भूखे होते है, जो हमारे पास बहुत है"
"बहू! तुम ये क्या कह रही हो?"
"माँ जी मंदिर में स्थापित प्रतिमा तो केवल भगवान का प्रतीक है,और जिनको भोग लगाने हजारों लोग, लाइन लगाकर खड़े हैं।पर मंदिर के बाहर, भूखे-प्यासे, दीन -दुखी लोग बैठे हैं, जिनके अंदर भगवान का वास है,जिन्हें सचमुच खाने की जरूरत है,उनके  बारे मे कितने लोग सोचते हैं।वास्तव में भगवान, प्राणी सेवा से प्रसन्न होते हैं, न कि भौतिक आडंबर से"
"मां जी *दूसरे की सेवा ही सच्चा धर्म है,और इसी से पुण्य और सुख  दोनों मिलते है"*
शारदा अपनी आधुनिक बहू के विचार जानकर भाव विहल हो उठी।
                    
अर्चना राय, भेडाघाट, जबलपुर ( म. प्र. )

Hindi Story by Archana Rai : 111124953
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