Hindi Quote in Story by Malti Basant

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दोस्‍ती
नीना के पिता का ट्रांसफर बीच सेशन में हुआ था। फिर भी उसे एक सरकारी स्‍कूल में प्रवेश मिल गया। किन्‍तु तब तक एक तिहाई पाठ्यक्रम पढ़ाया जा चुका था।

नीना के हाथ-पैर घबराहट से फूल रहे थे, कैसे वह सबके बराबरी मे आयेगी, कौन उसे बतायेगा।

जल्‍दी ही उसकी समस्‍या का समाधान भी हो गया, उसी की कक्षा की एक अत्‍यंत मेघावी छात्रा सुमन ने उसकी मदद की ठान ली और अपने नोट्स इत्‍यादि भी लिखने को दे दिये।

नीना सुमन से बहुत प्रभावित हुई उसने मन ही मन निश्‍चय किया कि वह इसी छात्रा से दोस्‍ती बनाये रखेगी वह अपने घर से अच्‍छी-अच्‍छी वस्‍तुएँ लाती और दोनों स्‍कूलों की छुट्टी में वही खाती।

सुमन उसे भोली-भाली लगी और थी भी पता चला कि वह गरीब घर से और दलित वर्ग से थी। स्‍कूल की अन्‍य लड़कियों को उनकी दोस्‍ती अच्‍छी नहीं लगी और वे उसे तुडवाने लगी। उसके कान भरने लगी।

यह जानकर नीना परेशान हो गई जिसके गुणों को देखकर वह दोस्‍ती चाहती थी, वह तो दलित निकली, अपनी कष्‍ट परेशानी किससे कहे? तभी उसे याद आया कि उसकी माँ ने कह भी रखा था कभी कोई परेशानी हो तो मुझसे कहे। उसने निश्‍चय किया कि वह सुमन के बारे में आज ही माँ से बात करेगी।

शाम को वह घर पहूँची, बस्‍ता एक ओर रखा और माँ के पास गई, उसे परेशान देखकर माँ ने पूछा ‘क्‍या हुआ नीना क्‍यों परेशान हो’

‘हाँ, माँ मेरी एक परेशानी है, आप बताओं मैं क्‍या करूँ?’

माँ हम लोग बीच सेशन में इस शहर आये थे। एक लड़की है, सुमन उसने मेरी पढ़ाई में बहुत मदद की। तो इसमें समस्‍या की क्‍या बात है? माँ ने पूछा

‘माँ समस्‍या है, बहुत बड़ी समस्‍या।

माँ हम लोग ब्राह्राण है और वह लड़की अनुसूचित जाति की है। स्‍कूल की लड़कियों ने कहा कि उसके साथ बैठकर मत खाया करो।‘

‘क्‍या वह गंदे ढंग से रहती है।

नहीं माँ वह तो बहुत अच्‍छे से तैयार होकर आती है। पढ़ाई में भी होशियार है। वह कहीं से भी दलित नहीं लगती, पर उसके साथ बैठकर खाया तो है।

‘तब तो कोई समस्‍या ही नहीं है,’ माँ सोचकर बोली।

‘’कैसे माँ, नीना आश्‍चर्य से बोली, देखो तुमने कहा वह साफ सुथरे ढंग से रहती है।

पढ़ाई में भी वह होशियार है, तुम्‍हारी मदद भी करती है’

‘हाँ-हाँ’

‘तो यह बात जान लो मनुष्‍य की पहचान उसके गुणों से होती है ईश्‍वर तो सबको समान बनाता है वह तो कोई भेदभाव नहीं करता। जाति तो मनुष्‍य ने अपनी सुविधा व स्‍वार्थवश बनाई है जिन्‍हें छोटी जाति का मान लिया उसमें भी कई महापुरूषों ने जन्‍म लिया है। कबीर, रैदास, दादूदयान, सहजो बाई, एकलव्‍य की कथा तो तुम्‍हें पता है ही तो मनुष्‍य की पहचान उसके जन्‍म से नहीं कर्म से होती है।‘ समझी ना केवल उससे जाति के कारण दोस्‍ती मत तोड़ों, कभी उसे घर लेकर आओ।

नीना का चेहरा एक निश्‍चय से चमक उठा।

Hindi Story by Malti Basant : 111124805
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