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डॉक्टर रमेश शहर के जाने माने डॉक्टर है, उनकी नजर में गरीब लोग समाज के बोझ है ,जबकि डॉक्टर खुद गरीबी से उठे हुए थे,उनकी फीस और इलाज़ भी अमीरों के हिसाब से था
अगले हफ्ते उनकी बिटिया की शादी है, इसलिए डॉक्टर साहब कल से हफ्ते भर की छुट्टी पर रहेंगे,
तो आज ही सारे पेशेंट देखना होगा,ऑपरेशन भी करना है।
अमीर लोगों के इस क्लीनिक में बाहर लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे,तब ही एक सज्जन पुरुष हांफता हुआ, एक बदहाल युवक को लेकर आया, उसने ने काउंटर पर बैठे आदमी से कहा "इमरजेंसी है ",
बिना फीस रिसेप्शनिस्ट ने डॉक्टर को दिखाने का मना कर दिया , काफी विनती के बाद रिसेप्शनिस्ट ने डॉक्टर साहब से पूछा कि एक इमरजेंसी है,पर पेशेंट के साथ आय व्यक्ति गरीब है फीस नहीं दे सकते ,डॉक्टर ने कहा "फीस नहीं तो इलाज़ नहीं",
सज्जन पुरुष रूहांसा होकर युवक को क्लीनिक के दरवाजे के पास टिकाकर चलता बना सब लोग देखते रहे और अपनी अपनी बीमारी दिखा कर चले गए ,
डॉक्टर साहब घर जाने के लिए बाहर निकले तो उस युवक को देखा उसकी सांसे जा चुकी थी,
डॉक्टर साहब वहीं नीचे जमीन पर बैठ कर रोने लगे,वो उनका बेटा विक्की था जो गुस्से में अा तीन साल पहले घर छोड़ कर चला गया था,डॉक्टर साहब ने उसे बहुत ढूंढा, पैसा पानी की तरह बहाया पर वो ना मिल सका था,
आज विक्की ज़िंदा बच जाता अगर डॉक्टर के मन में थोड़ी सी मानवता ज़िंदा बच जाती।