"कसक" लघु कथा
"क्या ये तुम्हारा आखिरी फैसला है"
"हां"
"एक बार फिर सोच लो"
"बहुत सोचने के बाद ही मैने ये फैसला लिया है" मेघा ने घास नौचते हुए कहा!!
"और मेरा क्या होगा..... मैं कैसे जियुंँगा तुम्हारे बगैंर" मंयक ने कहा!!
"जैसे मैं जियुँगी......मैंने तुमसे प्यार किया पर तुम्हारा साथ नही दे पाऊँगी मंयक.....हम मिडिल क्लास लड़कियां बहुत कमज़ोर होती हैं....हम प्यार तो कर लेती हैं पर निभा नही पाती क्योंकि हमारी सारी कमज़ोरी हमारी फैमिली होती है" मेघा ने आसमान की तरफ देखते हुए कहा "अगर माँ बाप की पसंद को अपना लो तो सब ठीक वरना अपने माँ बाप की खुशियों के लिए उनकी इज़्ज़त के लिए हमें अपनी खुशियों को कुर्बान करना ही पड़ता है"
मंयक ने मेघा की आवाज़ में दर्द को महसूस करते हुए मेघा को देखा!!
"मैंने भी ऐसा ही किया है....चाहे तुम मुझे बेवफा समझलो"
"नही मेघा तुम बेवफा नही हो...ज़रूरी तो नही प्यार में मिलन ही हो....तुम कल किसी ओर की हो जाओगी और हो सकता है कल आगे जाकर मुझे भी अपनी ग्रहस्थी बसानी पड़े लेकिन मेरे दिल में तुम और तुम्हारा प्यार हमेशा रहेगा" मंयक ने मेघा के आंसू साफ किये। उसे पता था उसकी मेघा से ये आखिरी मुलाकात है। आज के बाद वो मेघा को कभी नही देख पाएगा पर वो फिर भी मुस्कुरा दिया था!!