प्रिय स्नेही मित्रों,
प्रस्तुत है मेरे नए प्रेम गीत
"मेरी जान क्यूँ याद आने लगी हो" से कुछ पंक्तियाँ-
जमीं आसमाँ पर,तुम्हीं तुम हो छायी,
पुरानी दीवारों पर रंगत है आयी,
सुबह शाम हरपल सताने लगी हो,
मेरी जान क्यूँ, याद आने लगी हो।।
सनम जब मिले थे, नए गुल खिले थे,
अँधेरे से मन में भी, जुगनू जले थे,
जमीं पर लिखा था, तराना दिलों का,
दो दिल जाके फिर आसमाँ में मिले थे,
जो बैठा मैं रातों में, दरिया किनारे,
तू बन चाँदनी मुस्कुराने लगी हो।।
-कवि राकेश सागर