मंजिलें हैं दूर हमसफर चाहिए ।
जिन्दगी को जीने का हुनर चाहिए ।।
वक्त ठहरा हुआ है सहरा मेँ ,
जिन्दगी को सकूँने --बसर चाहिए ।
उम्र छोटी बहुत मुस्किलों से भरी ,
दुआओं मेँ खुद की असर चाहिए ।
आज इंशा है वक्त से हारा हुआ,
हुस्न को बस कातिल नजर चाहिए ।
बुतपरस्ती भी जादा अच्छी नहीं ,
महफिलों की भी कोई खबर चाहिए ।
मयकदे मे मैं जी भर के पीता रहा ,
रंजो -गम की भी होनी कदर चाहिए ।
इश्क मासूम है ,खता नजरों ने की ,
प्यार से प्यारी जानिब नजर चाहिए ।
नमिता "प्रकाश "