?अब सवाल खडा हुआ जन जन तक कैसे पहोंच !?!
जीस को पसंद आए वो पहोंचा दे | आस पास के लोगों तक तो बात पहोंचे और अब तो कीतने बिकल्प है बात पहोंचा ने को |...ॐD
? लिखते लिखते / सीखते सीखते ही सीखा जाता है कुछ सीख कर लीखना / केहना ये तो कभी संभव ही नहीं | ( कुछ को छोड )...ॐD
?और एक बात आई है कहा है कि हमारा तो अच्छा है दुसरे का भी अच्छा है | दोनों को जोडो तब बात बनती है | अकेले खुद का अच्छा न होता दुसरो का भी अच्छा है ये स्विकार करना सीखें | ( थोडा अपनी तरफ से बदलाव कीया है और लिखा है )...ॐD