आवो रे आवो, आवो रे आवो
मेरे मन में गा के जाओ,
एक वीणा,एक बांसुरी, एक भारत
गा के जाओ,
एक गंगा, एक हिमाला, एक शिव
सुना के जाओ,
एक झंडा,एक शक्ति, एक स्वाभिमान
उठा कर जाओ।
एक दिन, एक वर्ष, एक युग
बिता कर जाओ,
एक प्यार, एक विश्वास, एक जीवन
जी कर जाओ,
आवो रे आवो, आवो रे आवो
मेरे भारत को पुकार के जाओ।
*महेश रौतेला