#जिंदा_किया_था
शिकायत रौशनीयों से क्या करते
जब उसने ही
आँखों पर हाथ रखके
अंधा किया था
खरीदकर अपने लिए क्या रखते
जब उसने ही
बाजार में रखकर
धंधा किया था
हाथ बढ़ाकर क्या करते
जब उसने ही
हाथों को
गंदा किया था
आँखों से आँखें क्या मिलाते
जब उसने ही
आँखों से गिराकर
शर्मिन्दा किया था
दोष उसका क्या देते
जब उसने ही
मोहब्बत करके
जिंदा किया था
विकास महतो