खुशी यों का दिन आया है
कचरा भरा पडा था वो हटाया है
न अब कोई तकलीफ है
न कोई परेशानी
जब चाहो तब मील सके
भात्रुभाव जग चुका है
साथ होने की एहमियत क्या है
सब जानते थे
पर बस गलत फैमीका कचरा भरा था
जो साफ फर दिया है
अब न तेरा है न मेरा है
सबका भाव जग चुका है...ॐD