तुम
तुम मुझसे मिलने ज़रूर आना
तुम मुझसे मिलने ज़रूर आना
तुम मेरे बचपन के साथी हो
तुम मुझसे मिलने ज़रूर आना
आम के पेड़ों पे झूलें लगा के
फूल कलिओ से सुंदर सजा के
बैठ कर उस्पर यूँ झूलें
एक पल में आकाश छू लें
वहीं कहीं बिखरा पड़ा होगा मेरा बचपन
जितना हो सके समेट लाना
तुम मुझसे मिलने ज़रूर आना
तुम मुझसे मिलने ज़रूर आना
बचपन के वो खेल
गुड्डे गुड़ियों का मेल
कभी छत पे क्रिकेट
कभी बच्चों की रेल
उस छत पे बिखरी यादों को
ज़ेब में अपने भरे लाना
तुम मुझसे मिलने ज़रूर आना
तुम मुझसे मिलने ज़रूर आना