ना तुम रूठ जाना, ना तुम दूर जाना,
इन आंखों को रोने की आदत नहीं है।
नजरें मिली तुमसे, लब भी थरथराए,
मगर इनको कहने की आदत नहीं है ।
वफाओं की राहों में मरना भला है,
मुझको तड़पने की आदत नहीं है।
जफायें जो अहदे चमन मेरा लूटे,
दिल को लूटने की आदत नहीं है ।
जमाने के सह लेंगे जुल्मों सितम,
मुझे भूल जाने की आदत नहीं है।।
तारा गुप्ता