कविता
आज भी एक तुम्हारी याद...
आज भी एक तुम्हारी याद…
छुपी है दिल के एक कोने में
आज भी एक तुम्हारी याद
आज भी एक तुम्हारी बात…
वो बचपन की प्यारी मुस्कान
मेरे नयन में बनकर एक ताज
तुम्हारी होठों के स्पर्श का वो राज
तुम्हारी चंचल नयन कि शरारती याद
आज भी एक तुम्हारी याद
आज भी एक तुम्हारी बात
सांझ ढलते सूरज के रोशनी की बात
बारिश मौसम मिलना नदियों के पास
रात अंधेरी में घर से दूर मिलने का राज
प्र:भात पंछियों की चहक के साथ
पनघट पाल पर तुम्हारी पायल की झंकार
ठंडी हवाएं ले आती तुम्हारी हसीं का पैगाम
आज भी एक तुम्हारी वो याद…
आज भी एक तुम्हारी वो बात
गणगौर मेलो में तुम संग झूलन
पतंग के संग बसंत त्यौंहार
उलझी डोर में छुपाकर प्यार
तिरछी नजरों का इजहार
आसमां की उचाईयों में पतंगों का राज
आज भी एक तुम्हारी याद
आज भी एक तुम्हारी बात
होली रंगों में बेशुमार
मिलाकर अपना प्यार
तूम्हारे हाथों का स्पर्श
निगाहें झुकने का समर्पण
तुम्हारी अनचाही जुदाई का लम्हा
तुम्हारी मुस्कान में गुमी चाहत
चक्षु समन्दर में गम का अहसास
तुम्हरे संग बिता हर पल
बना है तुम्हारी याद
आज भी एक तुम्हारी याद
आज भी एक तुम्हारी बात
आज भी एक तुम्हारी याद…
एन आर ओमप्रकाश।