*" देखने और सुनने का सही अर्थधटन करना जरुरी है "*...ॐD
?देखा - सुना गलत तब होता है जब गलत अर्थधटन कीया जाए | जैसे ही खाना शरीर के लिए आवश्यक है पर अगर स्वाद के लिए खाए तो खतरा पर स्वस्थ रेहने के लिए खाए तो कोई परेशानी नहीं | थोडा विस्तार से समझे तो -> कोई सोचता है कि कहीं पर भी जाए कुछ भी खाए कुछ भी हो जाए चिकित्सक तो हर जगह होता है | तो कोई सोचता है कि अगर मैंने स्वास्थ का खयाल न रखा मुझे कुछ हो जाए तो मैं कहां जाऊं |( जरुरी नहीं कि हर कीसीको हर खाना, वातावरण जमे ही ) जब हम स्वास्थका खयाल रख चलते है तो हमारी आधी से ज्यादा परेशानी खत्म हो जाती है कि बिमार पडे तो न चिकित्सक को ढुंढना पडेगा, न हमारे काम में कभी रुकावट आएगी, ना ही दुसरो को हमारी वजह से परेशानी होगी |
?इसलिए ये भी देखना जरूरी है कि हम सीर्फ जी रहे है या हमारी कुछ जरुरत है, इसलिए वो खुद को ढुंढ ना पडता है | इतना करे कि अच्छा न कर पाए चले पर बुरा ना करे तो भी काफी है |...ॐD