?दुनिया में न कोई बात अनिवार्य न कोई फर्ज निभाने का नियम है | ( जो करें वो सही हो तो खुद ईश्वर आपको आपके परिवार को सुरक्षित रखते है और गर्व दिलाते है / मान-सम्मान, प्रतिष्ठा प्रदान करते है )...ॐD
कहीं पर भी कुछ भी अनीवार्य नहीं, न कोई फर्ज अनीवार्य है कि पिता है उसे ये ये करना पड़ता है वरना नर्कमे जाएगा | जो शारीरिक व मानसिक कमजोर है वो तो अपने बच्चों के साथ कभी खेल नहीं सकता | समाज का नियम देखें तो बच्चे के साथ बच्चा बन खेले तो ही बच्चे को पिता पर प्यार आता है अपने लगते है |? फौजी तो अपने बच्चों के साथ खेल नहीं सकते पर फीर भी बच्चेका पिता के प्रति आदर कम न होता न मान बल्कि वो अपने पिता सा बनना चाहते है | फौजी अपने परिवार को ईश्वर के नेक बंदों के भरोसे छोड अपने बच्चे को रुलाके फौजी दुसरे बच्चे को अपनी माता-पिता की छत्रछाया मीले इसलिए निकल पडते है घर से दूर | दुसरो के बच्चे के चहरे पर मुस्कराहट लाने को रहते है घर से दूर | *" ईश्वर की रेहमत तो देखो "* उस बच्चे को जीस पिता ने कभी गोदी में न खीलाया फीर भी वो बच्चा पितासे नफरत नहीं करता बल्की अपने पिता के नक्षेकदम पर चल कर वही बात दोहराने निकल पड़ता है और ईश्वर फीर दुसरे मासुम को समजा देते है तेरा पिता बुरा नहीं बल्कि दुसरे पिता से कई गुना अच्छा है इसलिए वो बच्चा अपने पिता के नक्षेकदम पर चल फौजी बनने का सपना देखता है |...ॐD