मैं और फ़ेसबुक अक्सर ये बातें करते हैं
तुम न होतीं तो कैसा होता
मैं किससे चैट करता
किससे ब्लॉक होता
किसकी चुगली करता
किसको गालियां देता
फ़ेसबुक और मैं अक्सर ये बाते करते हैं
तुम न होते तो कैसा होता
इनबॉक्स में बहते अरमानों का कितना दम घुटता
राजनीति कैसी होती
धर्म को कोई कैसे समझता
मैं और फ़ेसबुक अक्सर ये बातें करते हैं
तुम न होतीं तो कैसा होता
किसके घर क्या बना ये कैसे पता होता
कौन कहाँ घूमने गया कौन बताता
किसी की सगाई, शादी, जन्मदिन का पता कैसे चलता
कैसे गोल्डन जुबली मनतीं, कैसे हनीमून होता
फ़ेसबुक और मैं अक्सर ये बाते करते हैं
मैं न होती तो कॉपी, पेंसिल, इरेजर का खर्च कितना होता
"वो" कैसे लेखिका बनती, तुम कैसे मठाधीश होते
मैं और फ़ेसबुक अक्सर ये बातें करते हैं
तुम न होतीं तो कैसा होता
न बीवी दिन रात कोसती
न बॉस गालियां देता
फ़ेसबुक और में अक्सर ये बातें करते हैं
अनन्त बातें हैं, जो हम करते हैं
सब बातें बताने की नहीं होतीं
इसलिए डरते हैं
मैं और फ़ेसबुक अक्सर ये बातें करते हैं ....