ऐसा न हो कि तू इसे भय में गुजार दे
ऐसा न हो तू जीवन दुख में गुजार दे
ऐसा न हो तू यहाँ समय अकेला गुजार दे
ऐसा न हो तू सारा वक्त बेसुध ही गुजार दे।
ऐसा न हो कि तू बिना प्यार के निकल ले
ऐसा न हो तू बिना काम के चल दे,
ऐसा न हो तू बिना पहिचान खो जाय,
ऐसा न हो तू बिना साथ के चल दे।
-महेश रौतेला