तुम जरा अपनी
जिंदगी को तो
गोर से देखो।
उसमें हैं क्या?
न तो कोई आनंद हैं,
न तो कोई संगीत हैं,
न तो कोई तारे,
न कोई फूल,
न कोई पंख,
की तुम आकाश में
उड़ सको।
नींद में धक्के खाते
हुए व्यर्थ का
कूड़ा करकट इकठ्ठे
करते हुए..क्योंकि
दूसरे भी यही
कर रहे हैं।
लोगो को इसकी
फिकर नहीं हैं कि
तुम जो कर रहे हो
वह क्यों
कर रहे हो?
अगर तुम
अपने से पूछोगे
तो सिर्फ एक ही
उतर पाओगे-
- क्योंकि सभी
यही कर रहे हैं।