शिकायत :-
ऐ खुदा क्या तू चाहता है बस इतना बता दे,
इस दुनिया की रीत ज़रा हमें भी सिखा दे |
दर्द तूने इतना लिखा है ज़िन्दगी में,
या मिटा दे ये ज़िन्दगी या बेरहम आवाम में जीना सिखा दे |
कैसा तूने है ये सच कैसा है ये झूठ बनाया;
हर इंसान ने झूठ में है सच को छुपाया |
तेरा ये खेल मुझे कुछ समझ में नहीं आया;
जिसने तोड़ा उसे तूने फूलों से है भरा और टूटने वालों को काँटों से है सजाया
कैसी तूने है ये सबकी किस्मत बनाई,
कहीं है ख़ुशी तो कहीं बस गम कि परछाई |
ऐ खुदा बस इतनी सी शिकायत है तुझसे कि आखिर तूने दर्द देने वालों को क्यूँ है जिताया |
(दीपिका ठाकुर)