माना की तेरी मौजूदगी से ये जिंदगानी महरूम है,जीने का कोई दूजा तरीका न मेरे दिल को मालूम है ।।तुझको में कितनी सीदत से चाह, चाहे तो रहना तू बेखबर।।
मोहताज मंझिल का तो नही है एकतरफा मेरा सफर ।।
सफर.......खूबसूरत है मंझिल से भी।।।।
मेरी हर कमी को है तू लाज़मी।
अधुरा हो के भी है इश्क़ मेरा कामिल।।
तेरे बिना गुज़ारा ए दिल है मुश्किल...........??