हर कोई अपने लिए अच्छा ही पसंद करता है इसलिए वो कीसी न कीसी के बात से काम से प्रभावित होकर जुडता है | पर जब ऐसा ही काम कोई दुसरा करता है तो वो दुसरे के पास नहीं जाता या तो वो बहुत ज्यादा प्रभावित है या डर के कारण या अंधविश्वास के कारण या कभी ऐसा भी बनता है दोनों तरफ से लाभ उठा लेते है | पर विरोध/झगडा तब होता है जब खुद को सही साबीत करने पर लगे रहते है | सोचना तो ये चाहिए कि वो भी अपना काम करें, मैं भी अपना काम करु लोगों को पसंद आए वहां से ले सकते है | लोग अपने लिए श्रेष्ठ ही चुनते है पर अपने फायदे के लिए कभी कबार बढा चढा तारीफ करने की वजह से लोग भ्रमीत हो जाते है ओर गलत का साथ दे देते है | *" विश्वास करने वालों का विश्वास नहीं टुटना चाहिए और विश्वास भी उसी पर करना चाहिए जो भ्रमीत न करते हो | "* ...ॐD