स्नेह:
अभी-अभी तो देखा था
प्यार को बढ़ता- चढ़ता पाया था,
उसे कदमों के बल आता देखा
हाथों के साथ हिलता देखा।
कोई कहानी कहते देखा
समय-समय पर उड़ते देखा,
आगे-पीछे मुड़ते देखा
बात-बात पर रोते देखा।
हर आँसू पर नाम उसी का
हर हँसी पर उत्साह उसी का,
समय-समय पर आवाज दिया था
प्यार में निर्मल भविष्य लिखा था।
-महेश रौतेला