चुलबुली गुनगुन
चुलबुली गुनगुन के दिल मे ढेर सारे ख़्वाब छिपे हैं।
जो हर पल में छुनमुन पायलिया सी छनकती रहती है।।
छोटी- छोटी बातों में खुशियाँ ढूंढ लेती है।
और हमेशा होंठों पे इक धीमी मुश्कान सजा के रखती है।।
जो हरएक पल को खुलके, हँसके, बेख़ौफ़ अपना बनाना जानती है।
जो हर लम्हे को हेलो हाय बोल के उनसे दोस्ती करना जानती है।।
चाहे खुशी का ख़ुशनुमा बसंत हो या गम के गड़गड़ाते बादलो का शोर।
मुश्कुराहट भरी सुबह हो या फिर रात की करवट बदलती चादर में छोड़े हुए चंद अल्फ़ाजो का अंधेरा घनघोर।
गम और ख़ुशी की इस बेजोड़ जीवनमाला से वो खुशियों के मोती चुन ही लेती है।
वो कहती है, मैं वो चोर हूँ जो कड़वी यादों को पीछे छोड़, बस मीठी यादों को चुरा के अपने दिल मे सजा लेती है।।