जी रहा हूँ मुर्दों की तरह मैं आज वो हिन्दुस्तान हूँ।
कराल विष पी रहा पर इस उम्मीद में हूँ जी रहा।
मर्यादा पुरुषोत्तम राम की,प्रेम के प्रतीक श्याम की।
उनकी यादों को सहेजे हुए मैं आर्यावर्त महान हूँ।
जिस धरती पर महावीर और बुद्ध ने जन्म लिया।
मैं युगों युगों का साक्षी वही भारतवर्ष महान हूँ।
सरहदों जिसके टकराकर कभी सिकंदर लौटा था,
जहाँ चाणक्य की नीति और चन्द्रगुप्त का पौरुष था।
जहाँ अशोक की महानता , और पोरस का साहस था
जिसके आँगन विश्व का प्रथम गणतन्त्र ने जन्म लिया।
हिन्दू धर्म का उदगम स्थल,सिंधु घाटी का आदि साक्षी।
महान मनीषियों की कर्मभूमि मैं शाष्वत हिंदुस्तान हूँ।