तेरी दुनियाँ तू ही जाने,क्या इसका होने वाला है।
आदमी आज आदम बन बैठा,नशा धन का छाया है।
सब रिश्ते नाते झूठ हो गए,बस अब शब्दों की माया है।
इंसान ही क्यों भगवान को भी,सरेआम ठक लिया जाता है।
सरेआम चीरहरण होता है लेकिन अब कहाँ बचाने वाला कन्हैया है।
किस पर करे भरोसा द्रोपदी जब हर तरफ दुर्योधन छाया है।
लाशों का ठेर लगा कर भी जिसे होता लेशमात्र भी न पछतावा है।
ऐशे दुर्दांत रावणों की फौज तले कब तक ये जग कुचला वाला है।
हे नाथ जगत के अब जागो,छोड़ शेष की शैया अब धरती पे आओ।
पाप के बोझ तले सिसक रही इस धरती को बस अब तेरा ही सहारा है।