जलता सूरज खुद तपकर भी जग में रोशनी फैलता है,
लेकिन स्वार्थी लोगों कब उसका दर्द समझ मे आता है।
जब ठिठुरते ठंड में वो कोहरे के पीछे छिप जाता है,
बड़े ही व्याकुल मन से सबको वो याद तब आता है।
यही नियम है इस धरती का सब बस स्वार्थ के रिश्ता है,बिना स्वार्थ के कहा किसी का किसी से नाता है।