कर्ण : - देवताओं में सबसे प्रमुख सूर्यदेव के पुत्र थे कर्ण। कर्ण सूर्य के अंशावतार थे। कर्ण के बारे में सभी जानते हैं कि वे सूर्य-कुंती पुत्र थे। उनके पालक माता-पिता का नाम अधिरथ और राधा था। उनके गुरु परशुराम और मित्र दुर्योधन थे। हस्तिनापुर में ही कर्ण का लालन-पालन हुआ। उन्होंने अंगदेश के राजसिंहासन का भार संभाला था। जरासंध को हराने के कारण उनको चंपा नगरी का राजा बना दिया गया था।
दुर्योधन : - दुर्योधन कलियुग का तथा उसके 100 भाई पुलस्त्य वंश के राक्षस के अंश थे। दुर्योधन हस्तिनापुर के महाराज धृतराष्ट्र और गांधारी के 100 पुत्रों में सबसे बड़ा पुत्र था। वेद व्यास के वरदान से ही गांधारी के 100 पुत्रों का जन्म हुआ था। दुर्योधन के असंख्य कुकृत्य के कारण अंततोगत्वा कौरव और पांडवों में युद्ध आरंभ हो गया। दुर्योधन गदा युद्ध में पारंगत था और श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का शिष्य था। दुर्योधन ने कर्ण को अपना मित्र बनाया था। गांधारी द्वारा देखे जाने से उसका शरीर वज्र के समान हो गया था लेकिन कृष्ण के छल के कारण उसके गुप्तांग का स्थान कठोर नहीं हो पाया जिसके चलते महाभारत युद्ध में भीम ने दुर्योधन को उसकी जंघा से पकड़कर उसके दो फाड़ कर दिया और इस तरह दुर्योधन मारा गया।
अर्जुन : - इनके धर्मपिता पांडु थे, लेकिन असल में वे इन्द्र-कुंती के पुत्र थे। देवराज इन्द्र ने अर्जुन को बचाने के लिए कर्ण के कवच और कुंडल उनसे छल द्वारा छीन लिए थे। देवराज इन्द्र एक ब्राह्मण के वेश में पहुंच गए कर्ण के द्वार और उनसे दान मांग लिया।
भीम : - भीम को पवनपुत्र कहा जाता है। हनुमानजी भी पवनपुत्र ही थे। कहते हैं कि भीम में 10 हजार हाथियों का बल था। भीम ने बलराम से गदा युद्ध सीखा था। भीम ने ही दुर्योधन और दुःशासन सहित गांधारी के 100 पुत्रों को मारा था। द्रौपदी के अलावा भीम की पत्नी का नाम हिडिंबा था जिससे भीम का परमवीर पुत्र घटोत्कच पैदा हुआ था। घटोत्कच ने ही इन्द्र द्वारा कर्ण को दी गई अमोघ शक्ति को अपने ऊपर चलवाकर अर्जुन के प्राणों की रक्षा की थी।
युधिष्ठिर : - युधिष्ठिर धर्मराज-कुंती के पुत्र थे। युधिष्ठिर के धर्मपिता पांडु थे और वे 5 पांडवों में से सबसे बड़े भाई थे। वे सत्यवादिता एवं धार्मिक आचरण के लिए विख्यात थे। अनेकानेक धर्म संबंधी प्रश्न एवं उनके उत्तर युधिष्ठिर के मुख से महाभारत में कहलाए गए हैं। उनके पिता धर्मराज ने यक्ष बनकर सरोवर पर उनकी परीक्षा भी ली थी। द्रौपदी के अलावा उनकी देविका नामक एक और पत्नी थी। द्रौपदी से प्रतिविंध्य और देविका से धौधेय नामक उनके 2 पुत्र थे। ये सशरीर स्वर्गारोहण कर गए थे।