उस रात की क्या बात करूं
जब हम और तुम मीले थे
आसमान भी साथ था
उसमे भी चाँद और तारे खिले थे
रंगीन था समा
बाते कुछ अनकही सी थी
महकी थी हवाए
शामें कुछ ऐसी थी
शायद यही हमारे प्यार की
पहली निशानी थी
बेवजह मेरा हँसना
शायद तुझे पसंद था
खामोशी में भी वो बातें
इशारे का पैगाम था
बात बात पे जगड़ना
कुछ ऐसा था
साथ जीने मरने का वादा
अब वो भी पुराना था
शायद यही हमारे प्यार की
पहली निशानी थी
आंखों से आंखे चुराना
हाथो तले उंगलियां दबाना
कदम से कदम मिलकर चलना
तेरा रूठना मेरा शर्माना
दिमागकी छोड़ बस दिलकी सुनना
पुरानी बाते याद करके
नई बाते की शुरुआत करना
शायद यही हमारे प्यार की
पहली निशानी थी
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