Hindi Quote in Story by kavita jayant Srivastava

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◆ रस से भरी जिंदगी◆ 2

इमरती : "हां तो राजमाता हम करेंगे न मेहनत ! हम मिठाई की दुकान खोल लेंगे ! कुंवर जी दुकान पर बैठ कर गद्दी सम्हालेंगे ! चार पैसों का प्रबंध कर ही लूंगी मैं,
मेरे बापू ने मेहनत करनी सिखाई है सब आ जावेगा..!"

कुंवर : "राजमाता आप इतनी कठोर कैसे हो सकती हैं ? खैर जैसी आपकी मर्जी ..मुझे राजसत्ता का कोई मोह नही "
कहकर कुंवर इमरती के संग चला गया था राजमाता ने मुड़कर देखा तक नही ..}

राजमाता को लगा था कुंवर चार ही दिन में लौट आएंगे ,जब प्रेम का भूत उतर जाएगा ...और जिंदगी की दाल रोटी समझ आएगी ..ऐशो आराम में पला राजकुंवर कितने दिन रह सकेगा कष्ट में ? परन्तु आज तक वो कुंवर के लिए तड़प रही हैं और आज पूरे 7 साल होने को आये किंतु कुंवर नही लौटे ..

राजमाता गाड़ी से उतर कर जलेबियों को पकड़ कर बोली ,देखने मे तो बड़ी स्वादिष्ट हैं कौन बना रहा इनको ?

"जी कोई लड़की है .."

" चलिए दीवान जी आज हम भी इन रस से भरी जिंदगी का स्वाद लेंगे ..! हमें एक शॉल दीजिये हम मुंह ढंक कर जाएंगे ..ताकि किसी को ये न लगे कि राजमाता जलेबी का मोह न त्याग सकी !"

और वह शॉल लपेट कर दुकान पर पहुंची , और दुकान पर इमरती को देख खुश हो गयी ..इमरो ने उसको नही पहचाना , और निश्छल भाव से ग्राहक मान कर जलेबी का दोना पकड़ा दिया

कैसी स्वादिष्ट जलेबियाँ बनाती हो बेटी ! कहाँ से सीखा ?

हमारे बाउजी ने सिखाया था हमें माता जी..! और ले लो आप यदि इच्छा हो तो "

" नही बेटा मैं तो वैसे मीठा नही खाती पर इन जलेबियों की तारीफ मेले में सुनकर चली आयी ..ऊपर से इन्हें वो बच्चा चिल्ला चिल्ला कर "रस से भरी जिंदगी" कह रहा था सो इन रसभरी जिंदगी को जी भर के देखने चली आयी वैसे कौन है वो लड़का ?

" जी वो मेरा पुत्र है ..राजवीर ..!

"राजवीर तो बड़ा ही प्यारा नाम है ..और इसके पिता ? वो कहाँ हैं ?

"इसके पिता अस्वस्थ हैं घर पर हैं ..हम यहां मेले में कमाई करने चले आये ,उनके इलाज के लिए पैसे जुटाने थे .!'

"ओह्ह, क्या हुआ उन्हें ? कोई गम्भीर बीमारी तो नही ?

"नही ,माताजी ..दरअसल मेरे पति नाजो में पले बढ़े थे, साधारण रहनसहन व खानपान से कमजोर हो गए एवम उन्हें रोगों ने घेर लिया , तिस पर अपनो से दूरी ने उन्हें तोड कर रख दिया है , पर मैंने जब उनका हाथ थामा था तो सोच कर रखा था कि, उन्हें कभी अकेला व दुखी नही छोडूंगी , हमारा मिठाइयों का कारोबार भी है अच्छा खासा , ये तो पर्व त्योहार थे तो इस मौसम में कमाई हो जाती है अच्छी खासी..!

" अच्छा तो ये बात है ..इसीलिए तू कारोबार करती है मिठाइयों का ..!"



शेष अगली क़िस्त में ...
कविता जयन्त

Hindi Story by kavita jayant Srivastava : 111067714
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