जिंदगी को मिलने कोई महमान आ रहा है।
'बिलगेसाहब' नया साल आ रहा है।
ए फूलों की तरह खिलाएगा,मोमबत्ती की तरह रुलाएगा।
ए मर्ज़ बनकर सताएगा,तो दवाई के कुँवे से मिलाएगा भी।
ए राह-ए-मंजिल दिखाएगा
तो राहों में काँटे बिछाएगा भी।
तज़ुर्बे नए लेकर नया रहनुमा आ रहा है।
'बिलगेसाहब' नया साल आ रहा है।
ए साल है जैसे घना जंगल।
अंदर जिसके जिंदगी छुपी है।
कहीं पे ख़ुशियों के झरने।
तो कहीं अश्कों की झीले है।
कहीं पे शहद के फल।
तो कहीं ज़हरिले फूल खिले है।
नया साल नए अवसरों की माला है।
ख़ुशियों ग़मों का मेला है।
अँधेरों को मिलने कोई चिराग आ रहा है।
'बिलगेसाहब' नया साल आ रहा है।
नया साल नए रिश्तों की बारात है।
नए दोस्त और दुश्मनों की सौगात है।
ए मेरी राहों का चिराग,
यादों की बाग है।
मेरी उम्र का रथ,
सफर का मुसाफ़िर है।
जिंदगी पे खिची हुई इम्तिहानों की लकीर है।
मिलने साहिल को समंदर आ रहा है।
'बिलगेसाहब' नया साल आ रहा है।
ए कैसा दौर है ए कैसा मोड़ है।
एक साल मिल रहा,एक बिछड़ रहा है।
एक आँख में जानेवाले का गम।
दूजी आनेवालेे के खुशी में नम है।
एक जिंदगी से रुख़सत हो रहा है।
तो दूजा तशरीफ़ ला रहा है।
जिंदगी को मिलने नया अफ़साना आ रहा है।
'बिलगेसाहब' नया साल आ रहा है।
Written by-बिलगेसाहब.(MADHUKAR BILGE)