Hindi Quote in Story by kavita jayant Srivastava

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◆ रस से भरी जिंदगी ◆ 1

सुंदरगढ़ के मेले में बड़ी ही चहल पहल थी ढोल नगाड़े झूले खिलौने खेल जादूगर सब थे.. कहीं निशाने लगाने वाला.. कहीं चूड़ियों की दुकान , तो कहीं बर्तनों के ठेले कहीं रंग बिरंगी चुनरी ,कहीं साड़ियों की कतारें ..कहीं खेल दिखाते मदारी और बंदर ...तो कहीं मिट्टी के सुंदर बर्तनों की प्रदर्शनी हर ओर जैसे बहार ही बहार थी..।पर इस खुशनुमा मेले में भी राजमाता का दिल उदास था बड़ी उम्मीद से वे मेले का भ्रमण कर रही थी कि कहीं उनका कुंवर दिख जाए ।
तभी एक मिठाई की दुकान पर काफी भीड़ सी दिखी, भीड़ ने शोर मचा रखा था "रस से भरी जिंदगी" "रस से भरी जिंदगी"
रस से भरी जिंदगी ये शब्द बार बार उनके कानों में सुनाई पड़ रहा था राजमाता ने उत्सुकता वश अपने पी ए दीवान जी से कहा कि,कैसी है ये दुकान ? जरा मुझे ले चलिये ! देखूं तो ,ये रस से भरी जिंदगी आखिर है क्या ? उनके पीए ने आगे बढ़कर मामला समझा और कहा
"राजमाता वहां तो जलेबियों के दोने मिल रहे हैं और एक 5 वर्ष का बालक इन जलेबिओं का नाम रस से भरी जिंदगी बतला रहा है..!"

राजमाता की आंखों में आश्चर्य और खुशी के आंसू भर गए उन्हें यकीन हो गया कि 'जरूर आज उन्हें उनका कुंवर मिल जाएगा' और वह खुशियां भी मिल जाएंगी जिसे उन्होंने तकरीबन 7 साल पहले ठुकरा दिया था.."

उनकी आंखों में साल भर पहले का वह दृश्य नाच उठा जब कुंवर ने अपने प्रेम के विषय में उन्हें बताया था और उस साधारण कुल की कन्या से मिलवाया था

{ राजमाता : "तो तुम हलवाई की बेटी हो , और तुम्हारा ब्याह हम अपने कुंवर से कर दें ? तुम दोनों का मेल सम्भव है ? क्या समाज का ऊंच नीच नही समझती तुम? " राजमाता ने क्रोध में भरकर राजकुंवर को देखते हुए इमरती से कहा

इमरती : (मुस्कुरा कर भोलेपन से बोली).." राजमाता हम तो प्रेम की भाषा जानते हैं ,एक हलवाई और राजसी खानदान के अंतर और ऊंच नीच को नही समझ सके थे, अब आप ही बताइये जो हुकुम हो ,हम वही करेंगे..!"

कुंवर ने इमरती का हाथ पकड़ लिया "अरे ये क्या बोल रही हो तुम इमरती , राजमाता कभी तुम्हे मेरे साथ विवाह करने की स्वीकृति नही देंगी ..!

राजमाता : " ठीक है पर विवाह के बाद तुम दोनों को महल में नही एक झोंपड़े में रहना होगा ,और राजकुमार की तरह नही एक साधारण पुरुष की तरह, न तुम राजमहल के सुख सुविधाओं का उपभोग कर सकोगे न ही भविष्य में कभी राजा बन सकोगे ,अब सोच लो तुम्हे यह लड़की चाहिए या राजसत्त्ता ?"

कुंवर :"मंजूर है, मुझे मेरी इमरो चाहिए ..हर हाल में ! "

राजमाता :" मंजूर है, अरे पर खाओगे क्या ? और खिलाओगे क्या ? मेहनत की कमाई के लिए मेहनत भी करनी पड़ती है राजकुंवर जो तुमने वचपन से आज तक नही की है,चार दिन में ही अक्ल ठिकाने आ जायेगी !"

क्रमशः
-कविता जयन्त

Hindi Story by kavita jayant Srivastava : 111066989
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