ए जिदंगी तुं मुसीबत दे मूजे में पार करके दिखावुंगी ।
तुं हारने की वजह दे मुजको चार , में तब भी जित जाउंगी ।
तुं अधेरा दे मुजे चारो तरफ
में खुद उजाला बन जाउंगीं ।
तुं दुश्मन दे अगर हर मोड पे मुजको
उनकी भी दोस्त बन जाउंगी ।
तुं चांद छीन ले अगर मेरा मुजसे
में तारो को अपना बनाउंगी ।
तारे भी धोका दे गये अगर
में आसमान बन जाउंगी ।
में हार नहीं मानने वाली
इस दूनिया में अपना नाम करके जाउंगी
सारी विपरीत परिस्थितीयो से भी जीत के जाउंगी ।