घुटनों से रेंगते-रेंगते
कब पैरों पर खड़ी हुई
तेरी ममता की छाँव में
जाने कब बड़ी हुई
काला टीका दूध मलाई
आज भी सब कुछ वैसा है
मैं ही मैं हूँ हर जगह
माँ प्यार ये तेरा कैसा है?
तेरे लिये
सीधी-साधी,भोली-भाली
मैं ही सबसे अच्छी हूँ
कितनी भी हो जाऊ बड़ी
“माँ!” मैं आज भी तेरी बच्ची हूँ ?
#Unknown #shayari