एक काल्पनिक खत..
हम है आपके "बिन" और आज है आपका जन्मदिन..
कहना तो आज भी बहोत कुछ चाहता हूं, मगर कुछ कह नहीं सकता, क्योंकि वक्त ने अब करवट जो ली है..
पर हां चंद लफ्ज लिखता हूं इसी उम्मीद में की यह पैगाम आप तक पहोंच जाए.
मस्ती तो आज भी उतनी ही करना चाहता हूं जितनी हम पहले किया करते थें.
लडना भी चाहता हूं झगड़ना भी चाहता हूं,
रुठाना भी चाहता हूं मनाना भी चाहता हूं.
हसा हसा कर फिर से रुलाना चाहता हूं,
फिर से वहीं बचपनां करना चाहता हूं.
खैर छोडो यह सब बाते... वैसे भी अब तो यह सब सिर्फ एक ख्वाब बने रह गया है,
आखिर में सिर्फ इतना ही ख्वाब है हमारा की आप जहाँ भी रहे जैसी भी रहे बस हमेशा खुश रहे.
अभी