https://youtu.be/mlYWvdkZMqY
चैत ने करवट ली, रंगों के मेले के लिए
फूलों ने रेशम बटोरा – तू नही आया
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पेड़ों ने जादू कर दिया, जंगल से आयी हवा कि
होठों में शहद भर गया – तू नही आया |
आज तारों ने फिर कहा, उम्र के महल में अब भी
हुस्न के दिए जल रहे हैं – तू नही आया |
किरणों का झुरमुट कहता है, रातों की गहरी नींद से
रोशनी अब भी जागती है – तू नहीं आया |