कुछ पल फुर्सड वाले:
वो दुपहर की चाय की चुस्कियां।।।।
साथ में कुछ पुराने खत और चिट्ठियां।।।
वो बारिश की बूंदों से सजी खिड़किया।।
वो हस्ते हुवे बच्चो के हाथों में कागज़ की कश्तिया।।
वो पुराने यारो के साथ की हुवी मस्तिया।।
वो मोहब्बत होते ही दिल में उड़ती हुवी तितलियां।।
वो सर्दियों में ऊन की रजाईया।।।
वो नाज़ुक से हाथो में खनकती चुडिया।।।
वो बगीचों में खेलती गिलहरियां।।।
वो खिले हुवे फूलो की क्यारियां।।
वो मासूम से बच्चो की किलकारियां।।।
वो बचपन की तकरार वो यारीया।।
समेत ले खुशियो को वो हर कतरे में हे छुपी।।
कर ले दिल में हे जो सब।।माफ़ हे कुछ गुस्ताखियां।।।
सच में माफ़ हे कुछ गुताखिया।।
तू कर ले अब मनमानियां।।।
कुछ सपनो को जूता ले।थोड़ा उनको तू सजा ले।।
ले कागज़ और कलम तू।।लिख दे अपनी तू कहानिया।।
लिख दे अपनी तू कहानिया।।
~ANV~