तुम्हारे शब्द तो कविता बन ही जाने थे । बूझे दिल भी प्रियवर एक दिन खिल जाने थे । न कर शुक्रिया उनका जो तुझको मान देते हैं । तेरे बिखरे शब्द तुझे नई पहचान देते हैं । इरादे नेक हों जिनके, चरित्र बलवान हो जिसका । वो नजरों में समाकर पलकों पर सज ही जाते हैं ।
Abhinav