छाया
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रंगीन मौसम छाया था
उसे मिलने बुलाया था
वो आयी थी देरी से
चल भी गई जल्दीसे
इकरार प्यार का करना था
उससे भी तो सुनना था
आलम यह दिवाना हो गया
दिल भी बेगाना हो गया
वो जाते-जाते मुस्कुराने लगी
शायद मेरी मुहब्बत दिल्लगी लगी।
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सोनल सुनंदा श्रीधर